पितृ दोष तब उत्पन्न होता है जब पूर्वजों की आत्मा को समुचित श्राद्ध कर्म न मिलने, अकाल मृत्यु या अधूरी इच्छाओं के कारण अशांति रहती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य, राहु एवं शनि की विशेष स्थिति को पितृ दोष का कारण माना जाता है।
इस दोष के कारण परिवार में विवाह में विलंब, संतान संबंधी बाधाएं, आर्थिक कठिनाई एवं मानसिक अशांति जैसी समस्याएं देखी जाती हैं। पितृ दोष निवारण पूजा इन्हीं बाधाओं को शांत करने हेतु गया जी में विशेष वैदिक विधि से संपन्न कराई जाती है।
गया जी को पितरों की मुक्ति का सर्वोच्च स्थान माना गया है, इसलिए यहां संपन्न पितृ दोष निवारण पूजा सर्वाधिक प्रभावी एवं स्थायी फल देने वाली मानी जाती है। विष्णुपद मंदिर परिसर में विशेष हवन, पिंड दान एवं तर्पण के संयुक्त अनुष्ठान से पितृ दोष का पूर्णतः शमन होता है।
इस पूजा के पश्चात परिवार में सुख-शांति, कार्यों में सफलता एवं मानसिक स्थिरता का अनुभव होता है — ऐसा अनेक यजमान परिवारों का अनुभव रहा है।
यजमान की कुंडली एवं पारिवारिक स्थिति के अनुसार विशेष संकल्प लिया जाता है।
पितृ दोष शांति हेतु विशेष वैदिक मंत्रों का हवन सहित जाप किया जाता है।
पूर्वजों को पिंड एवं जल अर्पित कर आत्मा की तृप्ति सुनिश्चित की जाती है।
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