गया जी वैदिक सेवा

तर्पण पूजा सेवा

तर्पण पूजा सेवा

तर्पण पूजा सेवा क्या है?

तर्पण पितरों, देवताओं एवं ऋषियों को जल, काले तिल एवं कुश (पवित्र घास) के माध्यम से तृप्त करने की वैदिक विधि है। "तर्पण" शब्द का अर्थ ही है — तृप्त करना।

गया जी में फल्गु नदी के पावन तट पर संपन्न होने वाला तर्पण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह नदी स्वयं पितृ तर्पण हेतु सिद्ध एवं पवित्र मानी गई है।

फल्गु नदी पर तर्पण का विशेष महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार फल्गु नदी को माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त है, जिन्होंने भगवान राम की अनुपस्थिति में स्वयं इसी नदी के तट पर राजा दशरथ का तर्पण संपन्न किया था। तभी से यह नदी पितृ तर्पण हेतु सर्वाधिक पवित्र मानी जाती है।

यहां किया गया तर्पण पितरों को तत्काल तृप्ति प्रदान करता है तथा परिवार को पितृ दोष एवं संबंधित बाधाओं से राहत दिलाता है।

इस सेवा में क्या-क्या शामिल है?

फल्गु नदी तट पर पूजा व्यवस्था तर्पण सामग्री (तिल, कुश, जल पात्र) वैदिक मंत्रोच्चार पंडित जी का व्यक्तिगत मार्गदर्शन पितृ पक्ष विशेष सहयोग

पूजा प्रक्रिया

1

संकल्प

पितरों के नाम एवं गोत्र सहित तर्पण हेतु संकल्प लिया जाता है।

2

फल्गु स्नान

फल्गु नदी में स्नान कर शुद्धि प्राप्त की जाती है।

3

जल तर्पण

कुश एवं तिल सहित पितरों को क्रमवार जल तर्पण अर्पित किया जाता है।

संबंधित प्रश्न

पितृ पक्ष के दौरान तर्पण का विशेष महत्व है, परंतु अमावस्या, मृत्यु तिथि अथवा किसी भी शुभ मुहूर्त पर भी तर्पण संपन्न किया जा सकता है।

जी हां, शास्त्रों के अनुसार परिवार की महिलाएं भी विधिवत तर्पण कर सकती हैं, विशेषकर जब परिवार में कोई पुरुष सदस्य उपस्थित न हो।
पूजा शुल्क
₹11,000 / परिवार
  • अनुभवी गयावाल पंडित द्वारा संपन्न
  • संपूर्ण पूजन सामग्री शामिल
  • विष्णुपद मंदिर के निकट व्यवस्था
  • हिंदी एवं अंग्रेजी मार्गदर्शन

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