रुद्राभिषेक भगवान शिव के रुद्र स्वरूप का विशेष अभिषेक अनुष्ठान है, जिसमें जल, दूध, दही, शहद, घी एवं गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए रुद्री एवं वैदिक मंत्रों का पाठ किया जाता है।
गया जी में यह पूजा पितरों से संबंधित बाधाओं की शांति के साथ-साथ परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य लाभ एवं मानसिक शांति हेतु भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
भगवान शिव को पितरों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है, विशेषकर पितामहेश्वर धाम में। पिंड दान एवं श्राद्ध कर्म के साथ रुद्राभिषेक करवाने से पितृ दोष की शांति के साथ-साथ भगवान शिव की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।
यह पूजा नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर परिवार में सकारात्मकता, स्वास्थ्य एवं आर्थिक स्थिरता लाने में सहायक मानी जाती है।
यजमान द्वारा परिवार कल्याण एवं पितृ शांति हेतु संकल्प लिया जाता है।
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद एवं घी से क्रमवार अभिषेक किया जाता है।
वैदिक रुद्री मंत्रों के पाठ सहित आरती संपन्न की जाती है।
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