गया जी वैदिक सेवा

त्रिपिंडी श्राद्ध

त्रिपिंडी श्राद्ध

त्रिपिंडी श्राद्ध क्या है?

त्रिपिंडी श्राद्ध एक विशेष एवं व्यापक श्राद्ध विधि है जिसमें पिता, दादा एवं परदादा — इन तीन पीढ़ियों के पितरों (तथा माता पक्ष की तीन पीढ़ियों) के लिए एक साथ पिंड दान एवं तर्पण किया जाता है।

यह अनुष्ठान विशेष रूप से तब करवाया जाता है जब परिवार में कई वर्षों से नियमित श्राद्ध न हुआ हो अथवा पितरों की तृप्ति में किसी प्रकार की कमी महसूस हो रही हो।

त्रिपिंडी श्राद्ध क्यों आवश्यक है?

शास्त्रों के अनुसार यदि किसी परिवार में कई पीढ़ियों तक श्राद्ध कर्म ठीक से न हुआ हो, तो पितृ अतृप्त रहते हैं जिसका प्रभाव परिवार की उन्नति एवं सुख-शांति पर पड़ता है। त्रिपिंडी श्राद्ध एक साथ तीन पीढ़ियों को तृप्त कर इस कमी को पूर्ण करता है।

गया जी में यह विशेष श्राद्ध विधि सर्वाधिक फलदायी मानी जाती है क्योंकि यहां किया गया अनुष्ठान संपूर्ण वंश परंपरा के पितरों तक पहुंचता है।

इस सेवा में क्या-क्या शामिल है?

तीन पीढ़ियों हेतु पिंड दान सामग्री विस्तृत तर्पण विधि विशेष मंत्रोच्चार एवं संकल्प ब्राह्मण भोज व्यवस्था संपूर्ण पूजन मार्गदर्शन

पूजा प्रक्रिया

1

वंश संकल्प

परिवार की तीन पीढ़ियों के नाम सहित विस्तृत संकल्प लिया जाता है।

2

त्रिपिंडी अर्पण

तीनों पीढ़ियों के लिए क्रमशः पिंड अर्पित किए जाते हैं।

3

सामूहिक तर्पण

सभी पितरों की तृप्ति हेतु सामूहिक तर्पण संपन्न होता है।

संबंधित प्रश्न

यदि परिवार में लंबे समय से श्राद्ध न हुआ हो, पारिवारिक बाधाएं बार-बार आ रही हों, अथवा पूर्वजों के नाम-गोत्र की स्पष्ट जानकारी न हो, तब त्रिपिंडी श्राद्ध अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

नहीं, यदि सभी नाम ज्ञात न हों तो भी शास्त्रोक्त सामान्य विधि से समस्त पितरों के लिए यह श्राद्ध संपन्न कराया जा सकता है।
पूजा शुल्क
₹8,100 / परिवार
  • अनुभवी गयावाल पंडित द्वारा संपन्न
  • संपूर्ण पूजन सामग्री शामिल
  • विष्णुपद मंदिर के निकट व्यवस्था
  • हिंदी एवं अंग्रेजी मार्गदर्शन

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